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बालाघाट का स्याह सच: बैगा बच्चों की मौतें, आंकड़ों का अंतर और व्यवस्था की चुप्पी

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बालाघाट का स्याह सच: बैगा बच्चों की मौतें, आंकड़ों का अंतर और व्यवस्था की चुप्पी

आधिकारिक आंकड़े, कुपोषण, टीकाकरण की चूक और हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही — बालाघाट के आदिवासी गांवों से एक विस्तृत पड़ताल

                       बालाघाट के बिरसा और बैहर विकासखंड के जंगल-घिरे आदिवासी गांव — सांकेतिक चित्रण

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा और बैहर विकासखंड के जंगल-घिरे आदिवासी गांवों में 2026 का मानसून सामान्य बीमारी का मौसम नहीं रहा। बैगा (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह-PVTG) और गोंड समुदाय के बच्चों में बुखार, चकत्ते, खांसी, दस्त और त्वचा संक्रमण फैला। कई बच्चे घर पर ही मर गए। सवाल सिर्फ बीमारी का नहीं है। सवाल यह है—प्रशासन को कितनी देर लगी, टीकाकरण और पोषण व्यवस्था कितनी कमजोर थी, और मौतों का आधिकारिक आंकड़ा आज तक स्पष्ट क्यों नहीं है।

1. मौतों का आंकड़ा: सबसे बड़ा विवाद

यह मामला इसलिए विस्फोटक बना क्योंकि सरकारी आंकड़ा और जमीनी दावे एक नहीं हैं।

स्रोतमौतों की संख्याटिप्पणी
जिला प्रशासन (अगस्त की शुरुआत)6–8"मौसमी बीमारियां" बताया गया
मुख्यमंत्री मुआवजा घोषणा (29 अगस्त 2026)22 बच्चों के परिवारसीएम डॉ. मोहन यादव का दौरा
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड (Scroll.in के अनुसार)कम से कम 25विभाग के अपने रिकॉर्ड का हवाला
स्थानीय विधायक संजय उईके / विपक्ष19 से 30 तकसूची जारी करने का दावा
PIL और कई समाचार रिपोर्ट30 से अधिकअखबारों और याचिका के आधार पर
प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह (मीडिया रिपोर्ट)28प्रशासनिक आंकड़ा अभी भी अंतिम रूप से सार्वजनिक नहीं

महत्वपूर्ण सावधानी: केंद्र सरकार ने 5 सितंबर 2026 को स्पष्ट कहा कि इन मौतों को एक ही रोगाणु (single pathogen) से जोड़ना फिलहाल वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। जांच में मीजल्स, मलेरिया, दोनों का सह-संक्रमण, श्वसन संकट, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक—अलग-अलग नैदानिक परिस्थितियां मिली हैं। कई शुरुआती मौतें घर पर हुईं, इसलिए लैब रिपोर्ट और मेडिकल रिकॉर्ड सीमित हैं।

2. आंकड़े जो व्यवस्था की पोल खोलते हैं

केंद्र और राज्य की स्क्रीनिंग (सितंबर 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े):

  • 32,400+ लोगों की मेडिकल जांच
  • 7,711 बच्चों में गंभीर तीव्र कुपोषण (Severe Acute Malnutrition)
  • इनमें से 518 बच्चों को न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर में भर्ती
  • 13,406 बच्चों में डायरिया
  • 274 बच्चों में गंभीर निमोनिया
  • 431 बच्चे अस्पताल में भर्ती: 379 डिस्चार्ज, 52 इलाज/निगरानी में
  • 14,637 बच्चों (1–10 वर्ष) को मीजल्स-रूबेला की अतिरिक्त खुराक
  • निगरानी 3 गांवों से बढ़ाकर लगभग 50 गांवों तक
  • 600 से अधिक पेयजल स्रोत साफ/क्लोरीनेट
  • 4,338 घरों में कीटनाशक छिड़काव

केंद्र व राज्य की स्क्रीनिंग में सामने आए प्रमुख आंकड़े (सितंबर 2026 तक)

कुपोषण: सरकारी रिकॉर्ड भी चेतावनी दे रहे थे

टाइम्स ऑफ इंडिया ने जुलाई 2026 के आंगनवाड़ी आंकड़े प्रकाशित किए:

  • प्रभावित पट्टी के 28 आंगनवाड़ी केंद्रों में 6 वर्ष से कम के 1,149 बच्चे तौले गए
  • 213 मध्यम कम वजन
  • 18 गंभीर कम वजन
  • लगभग हर पांचवें बच्चे का वजन कम था
  • कुंडेकसा: 54 में से 29 कम वजन
  • बोंदारी: 69 में से 25 कम वजन

Scroll.in की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, एक 3 वर्षीय बच्ची प्रियंका धुर्वे का वजन मौत के समय मात्र 4 किलो था—जो लगभग 2 महीने के शिशु के बराबर है। आंगनवाड़ी रिकॉर्ड में उसे गंभीर कुपोषित नहीं दिखाया गया था।

टीकाकरण: कागजों और गांवों में फर्क

  • राष्ट्रीय लक्ष्य: 2026 तक मीजल्स उन्मूलन
  • NFHS के अनुसार बालाघाट में दोनों मीजल्स डोज कवरेज: 81.3%
  • WHO टीम ने बिरसा ब्लॉक में 177 बच्चों का सर्वे किया: पहली डोज 80%, दूसरी 70%
  • Scroll.in ने मृतक बच्चों के 7 परिवारों से बात की—6 परिवारों ने कहा कि उनके बच्चों को कोई टीका नहीं लगा

आंगनवाड़ी रजिस्टर और माता-पिता के बयान में अंतर भी रिपोर्ट किया गया।

पोषण आहार बंद होना

Scroll.in की रिपोर्ट के अनुसार, 6 वर्ष से कम बच्चों का टेक-होम राशन (चावल, दाल, सोयाबीन) मार्च 2026 के आसपास बंद हो गया। कारण बताया गया—सरकार द्वारा सप्लायर्स को भुगतान न होना। कुंडेकसा में अप्रैल तक स्टॉक खत्म हो चुका था। विभाग की ओर से रिपोर्ट में स्पष्ट जवाब नहीं मिला, ऐसा रिपोर्ट में लिखा गया।

3. देरी का सवाल: मई से जुलाई तक क्या हुआ?

Scroll.in की दो-भाग की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार:

  • मातला गांव में मई में महासिंह पार्टे के बच्चों की मौत हुई। एक कांग्रेसी सांसद ने संसदीय समिति में कहा कि पहली मौत 18 मई की है।
  • स्वास्थ्य विभाग जुलाई के अंत में सक्रिय दिखा, जब रिपोर्ट के अनुसार नौवीं मौत 22 जुलाई को हो चुकी थी।
  • नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) 12 अगस्त को तैनात हुई।
  • कई गांवों में आशा/एएनएम की कमी बताई गई।
  • जिला अस्पताल प्रभावित गांवों से लगभग 85 किलोमीटर दूर है। पीएचसी 15–40 किमी दूर बताए गए।

संसदीय स्थायी समिति (Social Justice and Empowerment) में विपक्षी सदस्यों ने देरी पर सवाल उठाए।

प्रशासन का पक्ष: शुरू में इसे मौसमी फ्लू समझा गया, परिवार अस्पताल नहीं आना चाहते थे, पारंपरिक उपचार पर निर्भरता थी, और कई मौतें रात में घर पर हुईं। पूर्व सीएमएचओ डॉ. परेश उपलाव ने कहा था कि परिवार अस्पताल से बच्चों को लेकर भाग रहे थे। बाद में उन्हें पद से हटाया गया।

4. पानी, स्वच्छता और PIL के आरोप

जनहित याचिका और कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया:

  • प्रभावित इलाकों के हैंडपंप से पीला पानी निकल रहा था
  • ICMR द्वारा लिए गए पानी के नमूनों में एडेनोवायरस पाए जाने की खबर प्रकाशित हुई
  • कई महीनों से महिलाओं और बच्चों को समय पर पौष्टिक आहार नहीं मिला—यह याचिका का आरोप है

ये बिंदु याचिकाकर्ता के हलफनामे और समाचार रिपोर्ट्स में हैं। अदालत ने इन पर सरकार से जवाब मांगा है। इन्हें अभी तक अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है।

5. हाईकोर्ट क्या कर रहा है?

                                      मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर खंडपीठ — सांकेतिक चित्रण
  • याचिकाकर्ता: अधिवक्ता अंशुल तिवारी, नरसिंहपुर
  • दायर: 1 सितंबर 2026
  • बेंच: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल (जबलपुर)

कोर्ट ने पहले साफ कहा—केवल अखबार पढ़कर PIL नहीं चलेगी, याचिकाकर्ता खुद मौके पर जाएं। तिवारी ने दौरा कर हलफनामा दाखिल किया। इसके बाद 9–10 सितंबर को नोटिस जारी हुए:

  • राज्य स्वास्थ्य विभाग
  • महिला एवं बाल विकास विभाग
  • बालाघाट कलेक्टर
  • अन्य संबंधित अधिकारी

अगली सुनवाई: 18 सितंबर 2026

याचिका में आरोप: पर्याप्त इलाज नहीं मिला, 50 बेड वाले अस्पताल में सैकड़ों बच्चों का इलाज, पीला पानी, पोषण की कमी, देर से जागा प्रशासन।

12 सितंबर 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने अडोरी, कोरका और बोंदारी का दौरा कर जवाबदेही की मांग की।

6. ये सवाल अब टल नहीं सकते

  1. PVTG क्षेत्र में टीकाकरण कवरेज कागजों से कम क्यों निकला?
  2. टेक-होम राशन बंद होने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं बनी?
  3. मई-जून की मौतों की सूचना स्वास्थ्य तंत्र तक क्यों नहीं पहुंची?
  4. आशा/आंगनवाड़ी निगरानी टूटी हुई क्यों थी?
  5. मौतों का एक अंतिम, केस-वाइज, सार्वजनिक आंकड़ा सरकार कब जारी करेगी?
  6. PM-JANMAN जैसी योजनाओं वाले इलाके में बुनियादी स्वास्थ्य पहुंच इतनी कमजोर क्यों रही?

ये सवाल आरोप नहीं हैं। ये उन्हीं आंकड़ों और रिपोर्ट्स से निकलते हैं जो सरकार, अदालत और स्वतंत्र मीडिया के पास हैं।

निष्कर्ष

बालाघाट की यह त्रासदी किसी "रहस्यमयी बीमारी" की कहानी नहीं रह गई। केंद्र स्वयं कह चुका है—एक वायरस नहीं, बल्कि बीमारी + कुपोषण + देर से इलाज + कमजोर टीकाकरण + दूरस्थ भूगोल का योग है।

22 परिवारों को मुआवजा राहत है, इलाज नहीं। 7,711 गंभीर कुपोषित बच्चे आंकड़ा हैं, भविष्य की चेतावनी भी हैं।

18 सितंबर को हाईकोर्ट सरकार का जवाब सुनेगा। उस जवाब में आंकड़ों की सफाई जितनी जरूरी है, उतनी ही जवाबदेही भी।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट प्रकाशित समाचार पत्रों, अदालती कार्यवाही और सरकारी बयानों पर आधारित है। मौतों की सटीक संख्या पर प्रशासन, विपक्ष और मीडिया के आंकड़े भिन्न हैं। कारणों पर अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष केंद्र की केस-वाइज समीक्षा और अदालत के आदेश के अधीन हैं। किसी अधिकारी या विभाग पर व्यक्तिगत आपराधिक आरोप इस रिपोर्ट का हिस्सा नहीं है।

समस्त स्रोत सूची

  1. The Hindu — Faith healing poses challenge…, 13 Aug 2026
    लिंक
  2. India Today — How a 'mysterious' disease is afflicting kids…, 18 Aug 2026
  3. The Times of India — Eight deaths in three months: What's killing MP's Baiga kids?, 18 Aug 2026
  4. The Daily Jagran — बालाघाट जिले में PIL से जुड़ी रिपोर्ट (हैंडपंप पानी व पोषण के आरोप), 20 Aug 2026
  5. Free Press Journal — 30 Child Deaths In MP's Balaghat: CMHO Removed, 2 Sept 2026
  6. Scroll.in — For months, tribal children kept dying…, 4 Sept 2026
    लिंक
  7. The Hindu — Centre, State caution against attributing it to a single pathogen, 5 Sept 2026
    लिंक
  8. The Times of India — Centre finds no single cause…, 5 Sept 2026
  9. Mathrubhumi English — Balaghat tribal children deaths: what happened…, 5 Sept 2026
  10. The Hindu — Parliament panel questions delay, 7 Sept 2026
  11. NFHS-6 (National Family Health Survey) — बालाघाट मीजल्स टीकाकरण कवरेज आंकड़े (रिपोर्ट में उद्धृत)
  12. The Hindu — HC seeks government's response, 10 Sept 2026
    लिंक
  13. The Times of India — HC notice to state govt, Balaghat collector, 10 Sept 2026
  14. Scroll.in — Behind deaths… vaccination levels, widespread hunger, 10 Sept 2026
    लिंक
  15. LiveLaw — 25 Tribal Children Allegedly Died… HC Seeks State's Response, 11 Sept 2026
  16. The Times of India — CJP's Abhijit Dipke visits tribal villages, 12 Sept 2026
टैग्स: बालाघाट, बैगा जनजाति, कुपोषण, आदिवासी स्वास्थ्य, हाईकोर्ट, मध्य प्रदेश
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