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बुधवार, 26 अगस्त 2026

 रिपोर्ट · शिक्षा नीति

उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूल बंद होने का सच: सरकारी आंकड़े, विपक्ष के दावे और स्टैटिस्टिकल एनालिसिस

thepointblankofficial.in  •  अपडेटेड: अगस्त 2026

उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राइमरी स्कूलों के बंद होने या दूसरे स्कूलों में "मर्ज" किए जाने का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से लगातार सुर्खियों में है। विपक्ष लाखों बच्चों के नामांकन घटने का दावा करता है, तो सरकार इसे सिर्फ "युक्तिकरण" (rationalisation) बताती है। इस रिपोर्ट में हमने सरकारी बयानों, विधानसभा के आंकड़ों, UDISE+ डेटा और स्कूल-मर्जर पर हुई स्वतंत्र रिसर्च — इन सबको साथ रखकर आंकड़ों और हकीकत दोनों को परखा है।

1. दोनों पक्षों के दावे — मुख्य आंकड़े

26,386अखिलेश यादव का दावा — 10 साल में बंद हुए स्कूल (अगस्त 2026)
27,764मायावती का दावा — कम-नामांकन वाले बंद/मर्ज स्कूल (नवंबर 2024)
28 लाख+विपक्ष के अनुसार घटा हुआ कुल छात्र नामांकन
62,000विपक्ष के अनुसार घटे सरकारी शिक्षक पद

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अगस्त 2026 में दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद बीते दस वर्षों में प्रदेश के 26,386 स्कूल बंद हो चुके हैं। उनके मुताबिक इस दौरान प्रदेश में कुल 28 लाख छात्रों का नामांकन घटा है, जिनमें से लगभग 25 लाख बच्चे पिछड़े और दलित समुदाय से हैं और इनमें 16 लाख बेटियां शामिल हैं। साथ ही उनका दावा है कि सरकारी शिक्षकों की संख्या में भी करीब 62 हजार की कमी आई है।

इससे पहले नवंबर 2024 में बसपा प्रमुख मायावती ने 50 से कम छात्र संख्या वाले 27,764 परिषदीय स्कूलों को "बंद करके मिलाने" के फैसले पर सवाल उठाए थे। वहीं राज्य सरकार दोनों ही मौकों पर इन आंकड़ों को "भ्रामक और निराधार" बताकर खारिज कर चुकी है, और कहती है कि सिर्फ 50 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का पास के स्कूल में विलय हो रहा है, कोई स्कूल स्थायी रूप से बंद नहीं हो रहा।

2. UDISE+ (केंद्र सरकार के आधिकारिक डेटा) से स्टैटिस्टिकल तस्वीर

राजनीतिक बयानों से अलग हटकर, शिक्षा मंत्रालय के UDISE+ (Unified District Information System for Education Plus) पोर्टल के आधिकारिक आंकड़े भी कुछ रुझान साफ दिखाते हैं:

बिहार (सबसे ज्यादा गिरावट)
35.65 लाख35.65 लाख
उत्तर प्रदेश
28.26 लाख
महाराष्ट्र
18.55 लाख

चित्र: 2018-19 की तुलना में 2023-24 में राज्यवार स्कूल नामांकन में गिरावट (UDISE+ / शिक्षा मंत्रालय)

UDISE+ 2023-24 रिपोर्ट के अनुसार 2018-19 के औसत की तुलना में उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के कुल नामांकन में करीब 28.26 लाख की कमी दर्ज हुई — जो बिहार के बाद देश में दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। हालांकि शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने इस गिरावट की एक बड़ी वजह डुप्लीकेट और फर्जी रिकॉर्ड्स के आधार-लिंकिंग के जरिए हटाए जाने को भी बताया है — यानी नामांकन में यह गिरावट पूरी तरह "बच्चों के स्कूल से बाहर होने" का संकेत नहीं है, बल्कि डेटा-सफाई का भी असर है।

सरकार के पक्ष में आंकड़े

मध्य क्षेत्रीय परिषद की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 2018 से 2022 के बीच प्राथमिक शिक्षा का ड्रॉपआउट रेट 9.7% से घटकर 2.7% रह गया, उच्च प्राथमिक में 5.7% से घटकर 2.9% (राष्ट्रीय औसत से भी कम) और माध्यमिक में 15.5% से घटकर 9.7% पर आ गया।

चिंता वाले आंकड़े

UDISE+ 2024-25 के अनुसार देशभर में लगातार तीसरे साल स्कूल नामांकन में गिरावट रही (2023-24 की तुलना में करीब 11 लाख कम), और 2024 में देशभर में 4,000 से अधिक सरकारी स्कूल घटे जबकि निजी स्कूलों की संख्या करीब दोगुनी रफ्तार से बढ़ी।

स्टैटिस्टिकल निष्कर्ष: आंकड़े परस्पर-विरोधी नहीं बल्कि दो अलग-अलग चीज़ें बता रहे हैं — एक तरफ सरकारी दावा है कि जो बच्चे स्कूल में हैं उनका ड्रॉपआउट रेट घटा है (retention बेहतर हुआ), दूसरी तरफ UDISE+ का डेटा दिखाता है कि सरकारी स्कूलों में नए नामांकन की कुल संख्या और स्कूलों की संख्या, दोनों घट रही हैं। यानी सवाल सिर्फ "कितने स्कूल बंद हुए" का नहीं, बल्कि "बच्चे कहां जा रहे हैं — निजी स्कूल, आंगनवाड़ी, या स्कूल से बाहर" का भी है।

3. असली सवाल: क्या मर्जर से ग्रामीण बच्चे शिक्षा से दूर हुए?

यह वो सवाल है जो आंकड़ों की राजनीति से परे जाकर पूछा जाना चाहिए। इसके लिए हमने उत्तर प्रदेश से बाहर भी देश में हुए स्कूल-मर्जर पर उपलब्ध स्वतंत्र शोध और अन्य राज्यों (राजस्थान, ओडिशा) के अनुभव को खंगाला, क्योंकि वहां इस नीति को यूपी से पहले और बड़े पैमाने पर लागू किया जा चुका है, और नतीजों पर विस्तृत अध्ययन उपलब्ध हैं।

RTE कानून के दूरी-मानक क्या कहते हैं

शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून, 2009 के तहत स्पष्ट नियम है कि हर बच्चे के घर से प्राथमिक स्कूल 1 किलोमीटर के दायरे में और उच्च प्राथमिक स्कूल 3 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। स्कूल मर्ज करते समय अगर यह दूरी इस सीमा से ज्यादा हो जाए, तो नियमानुसार बच्चों को स्कूल तक लाने-ले जाने की परिवहन सुविधा देना अनिवार्य है, ताकि कोई बच्चा स्कूल छोड़ने पर मजबूर न हो।

दूसरे राज्यों के अनुभव से मिले सबूत

स्कूल-मर्जर पर हुए प्रमुख अध्ययनों के निष्कर्ष
राज्य / अध्ययनमुख्य निष्कर्ष
राजस्थान (2014-16, ~17,000 स्कूल मर्ज)औसत दूरी 1.2–1.8 किमी तक बढ़ी; क्लासरूम में भीड़, ट्रांजिशन पॉइंट्स पर ड्रॉपआउट बढ़ा
ओडिशा, बालांगीर (आदिवासी क्षेत्र)ज्यादातर अभिभावकों ने बढ़ी हुई दूरी व बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई; अनियमित उपस्थिति व ड्रॉपआउट बढ़ा
बहु-राज्य अध्ययन (तेलंगाना, ओडिशा, राजस्थान, 2017)छोटे व दूर-दराज गांवों के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित; निजी स्कूलों की तरफ पलायन बढ़ा
राष्ट्रीय स्तर विश्लेषण (2024-25 UDISE+ आधारित)RTE दूरी-मानकों का अनुपालन औसतन 7% घटा; ग्रामीण इलाकों पर 82% असर; परिवहन खर्च बढ़ने से शुद्ध बचत घटी

इन अध्ययनों में एक समान पैटर्न दिखता है: जब छोटे, कम-नामांकन वाले स्कूलों को बड़े स्कूलों में मिलाया जाता है, तो अल्पावधि में सरकार का प्रशासनिक खर्च जरूर घटता है और सैद्धांतिक रूप से बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर व शिक्षकों तक पहुंच बढ़ती है — लेकिन व्यवहार में सबसे गरीब, सबसे दूर-दराज और आदिवासी/दलित बस्तियों के बच्चों पर ही इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है, क्योंकि उन्हीं के पास ट्रांसपोर्ट का विकल्प सबसे कम होता है।

उत्तर प्रदेश पर क्या लागू होता है?

उत्तर प्रदेश-विशिष्ट स्वतंत्र फील्ड-स्टडी (जैसा ओडिशा या राजस्थान में हुई) फिलहाल सार्वजनिक रूप से बड़े पैमाने पर उपलब्ध नहीं है, इसलिए यह कहना कि यूपी में ठीक वैसा ही असर हुआ, सीधे तौर पर सिद्ध नहीं किया जा सकता। लेकिन तीन बातें ध्यान देने लायक हैं:

  • यूपी में भी मर्जर की शर्त वही है — "50 से कम छात्र संख्या वाले स्कूल" — जो राजस्थान में अपनाई गई नीति (30 से कम छात्र) से मिलती-जुलती है, जहां दूरी और ड्रॉपआउट, दोनों बढ़े थे।
  • यूपी में लगभग 9,500 स्कूल ऐसे हैं जहां सिर्फ एक ही शिक्षक है और इनमें 6.24 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं — यानी पहले से ही संसाधनों का दबाव बना हुआ है, जो मर्जर के बाद और बढ़ सकता है अगर नए स्कूल में पर्याप्त शिक्षक व कमरे न बढ़ाए जाएं।
  • सरकार का यह दावा कि ड्रॉपआउट रेट घट रहा है, 2018-2022 के आंकड़ों पर आधारित है — यानी बड़े पैमाने पर मर्जर (जिसका आरोप 2024-2026 में लगा) के प्रभाव को पूरी तरह दर्शाने के लिए अभी उतना पर्याप्त डेटा सार्वजनिक नहीं है।

निष्कर्ष: राष्ट्रीय व अंतर-राज्यीय शोध के आधार पर यह कहना उचित है कि स्कूल-मर्जर नीति में जोखिम अंतर्निहित है — खासकर ग्रामीण, आदिवासी और दलित बस्तियों के लिए — अगर उसके साथ पर्याप्त परिवहन सुविधा, नई कक्षाओं और शिक्षकों की व्यवस्था न हो। लेकिन उत्तर प्रदेश में यह असर "कितना बड़ा" है, इसका ठोस, स्वतंत्र और स्थल-आधारित (field-level) आकलन अभी सार्वजनिक डेटा में उपलब्ध नहीं है — यह डेटा गैप खुद एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

4. निष्कर्ष: आंकड़े बनाम हकीकत

उत्तर प्रदेश में स्कूल बंद होने या मर्ज होने का मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है, और दोनों पक्षों के आंकड़े परस्पर-विरोधी हैं। लेकिन देश भर के दूसरे राज्यों में हुए स्वतंत्र शोध यह साफ इशारा करते हैं कि "कम छात्र संख्या" के आधार पर स्कूल मर्ज करने की नीति, बिना ट्रांसपोर्ट और इन्फ्रास्ट्रक्चर की ठोस गारंटी के, ग्रामीण और वंचित समुदायों के बच्चों के लिए दूरी, सुरक्षा और ड्रॉपआउट का जोखिम बढ़ा सकती है। साथ ही, सरकार का यह दावा भी आंकड़ों से समर्थित है कि समग्र ड्रॉपआउट रेट में सुधार हुआ है। दोनों बातें एक साथ सच हो सकती हैं — यानी कुल मिलाकर रिटेंशन बेहतर हुआ हो, फिर भी कुछ खास दूर-दराज बस्तियों के बच्चे पीछे छूट रहे हों। पाठकों से अनुरोध है कि अंतिम राय बनाने से पहले अपने जिले के स्थानीय UDISE+ आंकड़े और बेसिक शिक्षा विभाग की रिपोर्ट भी जरूर देखें।

संदर्भ (Sources)

  • अमर उजाला — "अखिलेश का बड़ा आरोप: बीते दस वर्षों में बंद हुए हैं प्रदेश के 26 हजार से ज्यादा स्कूल" (2 अगस्त 2026)
  • Jantantratv — "26 हजार स्कूल बंद, 81 हजार पद खाली: अखिलेश का सरकार पर बड़ा हमला"
  • ETV Bharat Hindi — "यूपी में बंद हो सकते 27000 सरकारी स्कूल!, मायावती, प्रियंका गांधी, केजरीवाल का हमला" (नवंबर 2024)
  • Careers360 Hindi News — "UP Schools Closure: सरकार ने 27,000 स्कूल बंद होने की रिपोर्ट को भ्रामक बताया" (5 नवंबर 2024)
  • Careers360 Hindi News — "यूपी में एक भी स्कूल नही होगा बंद...— बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री" (12 अगस्त 2025)
  • Careers360 Hindi News — "छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर में भारी कमी आई - सीएम योगी आदित्यनाथ" (5 अप्रैल 2026)
  • अमर उजाला — "Dropout Rate In UP: कम हुआ विद्यार्थियों का ड्रॉपआउट रेट" (मध्य क्षेत्रीय परिषद रिपोर्ट, दिसंबर 2023)
  • The Quint Hindi — UDISE+ रिपोर्ट 2024-25 पर विश्लेषण (सितंबर 2025)
  • Drishti IAS — "UDISE+ रिपोर्ट 2023-24" सारांश
  • Scroll.in — "Rajasthan school mergers promised quality education, but have led to cramped classrooms, dropouts" (2019)
  • Education 3-13 Journal — "School consolidation and educational equity... tribal children in rural Odisha" (2025)
  • IDEAS for India (ideasforindia.in) — "Restructuring India's schooling system" (Rajasthan मर्जर डेटा)
  • educationforallinindia.com — "School Mergers, Closures, and Demergers in India & its Impact on Universal Enrollment" (UDISE+ आधारित राष्ट्रीय विश्लेषण)

आधिकारिक डेटा के लिए: शिक्षा मंत्रालय का UDISE+ पोर्टल (udiseplus.gov.in) और बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट (dse.upmsp.edu.in) देखें।

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार रिपोर्टों, सरकारी/नेताओं के बयानों और प्रकाशित शोध-अध्ययनों पर आधारित है। इसमें दिए गए आंकड़े मूल स्रोतों/संबंधित पक्षों के अपने दावे हैं, न कि इस प्रकाशन के स्वतंत्र निष्कर्ष जब तक कि विशेष रूप से उद्धृत न किया गया हो। पाठकों से अनुरोध है कि अंतिम राय बनाने से पहले मूल स्रोतों और नवीनतम आधिकारिक सरकारी आंकड़ों को स्वयं भी जांच लें।

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